सोमवार, 18 मार्च 2013

गर कहीं लग जाए मदिरा का चस्का-----


गर कहीं लग जाए मदिरा का चस्का।
फिर तो खुदा खैर करे, किसी के न बस का।।



पीना इसको छोड़ दे, कहना मेरा मान ले।
मदिरा की ये प्यालियां, विष की प्याली जान ले।
विष भरी प्यालियां जो पिवोगे जनाब,
दुनियां मंे चंद रोज जिवोगे जनाब।
जिन्दगी का खेल समझो, शेष दस दिन का।।१।।

राजा-महाराजा गए, चली गई राजधानियां।
पी-पी प्याले मर गए, मिलती नहीं निशानियां।
बादशाह दीवान वो नवाब कहां हैं,
उनके वो नखरे ख्वाब कहां हैं ?
देखलो करिश्मा यारों की हवश का।।२।।

गली-गली में नाचते, लड़के पी-पी प्यालियां।
बिगड़ रही संतान सबकी, लोग बजाएं तालियां।
नाचती कुमारियां कुमार नाचते,
शादियों में बंदडे़ के यार नाचते।
एक बूढ़ा भी नाच रहा, सत्तर बरस का।।३।।

मन्दिर में भगवान् की, पूजा है ना पाठ है।
सूने-सूने से सब पडे़, पर मयखाने में ठाठ है।
देखले ‘बेमोल’ कैसा ढंग हो गया,
वेद का सिद्धान्त सारा भंग हो गया।
मंदिरों में भोग लगे, भांग और चरस का।।४।।

रचना-स्व. श्री लक्ष्मण सिंह ‘बेमोल’

(लय-गोरे-गोरे मुखड़े पे........)

जय बीड़ी मैया, बोल जय बीड़ी मैया--


जय बीड़ी मैया, बोल जय बीड़ी मैया।
तुम को निशि-दिन ध्यावत, भाभी और भैया।।



जो तुमको सुलगावे, खर्च बढे़ धन का। देवी खर्च..।
दुःख संकट घर आवे, रक्त मिटे तन का।।१।।

तुम हो एक शनिश्चर, जग की धूम्रपति।
किस विध बचूं हाय मैं, तू घर-घर मिलती।।२।।

तम्बू, बिछौना, बिस्तर, तू छलनी करती।
खेत और खलिहानों को, साफ तू ही करती।।३।।

तू व्यापक मन्दिर-मस्जिद, क्या बैठक खटिया।
विद्यालय शौचालय, क्या चूल्हा-चकिया।।४।।

कितने लोगों की तुम हो, औषधि और पट्टी।
जब मुंह में लग जावे, तब आवे टट्टी।।५।।

शुक्रवार, 8 मार्च 2013

भरोसा कर तू ईश्वर पर तुझे धोखा नहीं होगा--


भरोसा कर तू ईश्वर पर तुझे धोखा नहीं होगा।
यह जीवन बीत जायेगा तुझे रोना नहीं होगा।।



कभी सुख है कभी दुख है, यह जीवन धूप-छाया है।
हँसी में ही बिता डालो, बिताना ही यह माया है।।१।।

जो सुख आवे तो हंस लेना, जो दुःख आवे तो सह लेना।
न कहना कुछ कभी जग से, प्रभु से ही तू कह लेना।।२।।

यह कुछ भी तो नहीं जग में, तेरे बस कर्म की माया।
तू खुद ही धूप में बैठा लखे निज रूप की छाया।।३।।

कहां पे था, कहां तू था, कभी तो सोच ए बन्दे !
झुकाकर शीश को कह दे, प्रभु वन्दे ! प्रभु वन्दे !!४!!

नर-नारी सब प्रातः-शाम----


नर-नारी सब प्रातः-शाम,
भजलो प्यारे ओम् का नाम।


ओम नाम का पकड़ सहारा,
जो है सच्चा पिता हमारा।
वह ही है मुक्ति का धाम,
भजलो प्यारे ओम् का नाम।।१।।

कैसा सुन्दर जगत् रचाया,
सूर्य चाँद आकाश बनाया।
गुण गाता है जगत् तमाम,
भजलो प्यारे ओम् का नाम।।२।।

पृथिवी और पहाड़ बनाये,
नदियाँ - नाले खूब सजाये।
बिन कर कर्म करे निष्काम,
भजलो प्यारे ओम् का नाम।।३।।

ऋषियों-मुनियों ने है ध्याया,
अन्त किसी ने न उसका पाया।
करते हैं उसको प्रणाम,
भजलो प्यारे ओम् का नाम।।४।।

मन अपने को शुद्ध बनाओ,
विषय-विकारों से बच जाओ।
वेदों का यह ही फरमान,
भजलो प्यारे ओम् का नाम।।५।।

हीरा जन्म गँवाओं ना तुम,
‘नन्दलाल’ घबराओ ना तुम।
सन्ध्या करो सुबह और शाम,
भजलो प्यारे ओम् का नाम।।६।।

मंगलवार, 5 मार्च 2013

जीवन की घड़ियाँ यूँ ही न खो, ओम् जपो, ओम् जपो---


जीवन की घड़ियाँ यूँ ही न खो, ओम् जपो, ओम् जपो !
 चादर न लम्बी तान के सो, ओम् जपो, ओम् जपो !



ओम् ही सुख का सार है,
जीवन है, जीवन-आधार है।
प्रीति न उसकी मन से तजो,
ओम् जपो, ओम् जपो !!१!!

चोला यही है कर्म का,
करने को सौदा धर्म का।
इसके सिवाय मार्ग न कोई,
ओम् जपो, ओम् जपो !!२!!

मन की गति संभालिये,
ईश्वर की ओर डालिये।
धोना जो चाहो जीवन को धो,
ओम् जपो, ओम् जपो !!३!!

साथी बना लो ओम् को,
मन में बैठा लो ओम् को।
‘देश’ रहा क्यों समय हो खो,
ओम् जपो, ओम् जपो !!४!!