गुरुवार, 15 अक्टूबर 2015

ओ सुन ले शराबी क्यों करता खराबी ।


ओ सुन ले शराबी क्यों करता खराबी।
यूं दारू पीने में तो तेरी खेर नहीं।

छोटे-छोटे बालक तेरे उनसे प्यार नहीं है।
फिरे अवारा गलियों में जैसे घरबार नहीं है।
तुम घर को संभालो उन बालकों को पालो।
अरे बच्चों से तो तेरा कोई बैर नहीं।।1।।

धरती जेवर बेच दिए और इज्जत सारी खोई।
नहीं उधार पैसा मिलता आटा दे ना कोई।
तू मेरी मान जाता ना रोता दुःख पाता।
मैं तेरा ही तो भाई हूँ कोई गैर नहीं।।2।।

कभी नशे में चलते-चलते गलियों में पड़ता है।
कभी-कभी प्रचार में आकेे ‘रामरख‘ से लड़ता है।
जब होती है पिटाई फिर नानी याद आई।
धरती पर तेरा टिकता कोई पैर नहीं।।3।।



लय-ये पर्दा हटा दो जरा..................।

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